अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

ब्लेक फ्राइडे पर खरीददारी

Written By: AjitGupta - Nov• 28•17

थैक्स गिविंग गुरुवार को और ब्लेक फ्राइडे दूसरे दिन। पता नहीं ब्लेक क्यों कहा गया, शायद उस दिन भारी छूट के साथ बाजार खुलता है इसलिये या कुछ और पता नहीं। हम भी बाजार गये, दिन में 10 बजे निकले और उस मॉल में गये जहाँ कम भीड़ की सम्भावना थी। कम भीड़ कहाँ होगी, जहाँ छूट कम होगी। खैर हम भी जा पहुंचे एक मॉल में। गाडी को पार्किंग के लिये जगह चाहिये और हमारी गाडी घूमती रही, घूमती रही। आधा घण्टा बीता, फिर पोन घण्टा भी बीत गया लेकिन पार्किंग नहीं। गाडी को दूसरी ओर लेकर गये तब जाकर किस्मत का दरवाजा खुला और आखिर पार्किंग मिल ही गयी। इससे आप समझ गये होंगे कि कितनी भीड़ का सामना हम करने वाले थे! हमें डायमण्ड खरीदने का शौक चर्राया, देख ही लें कि यहाँ और हमारे देश में क्या अन्तर है। हमारे देश में तो दीवाली पर जौहरी की दुकानों पर कुछ ना कुछ ऑफर रहते हैं तो सोचा यहाँ भी होंगे लेकिन यहाँ कुछ नहीं था। सामान भी ज्यादा कुछ नहीं और छूट भी नहीं तो क्या खाक खरीददारी करें! हमारे दुकान से बाहर निकलते ही बेटे ने राहत की सांस ली होगी कि चलो मम्मी को कुछ पसन्द नहीं आया। हम फिर कपड़ों की दुकान की ओर मुड़े, देखा कुछ दुकानों पर बाहर ही लम्बी लाइन लगी है, यहाँ तो जाना सम्भव नहीं, आगे बढ़ गये। एकाध दुकान ऐसी थी जहाँ कतारे नहीं थी, हम वहीं गये। कहीं 50, कहीं 40, कहीं 30 तो कहीं 20 प्रतिशत की छूट थी। सारी ही मॉल गर्म कपड़ो से भरी थीं। कुछ समझ आया और कुछ नहीं, बस थोड़ा समय व्यतीत किया और लौट आए। दो चार स्वेटर खऱीदे बस।
वापस लौटते समय देखा कि घर लौटने वाली सड़क खाली और बाजार की तरफ जाने वाली सड़क ठसाठस भरी हुई। यहाँ इस दिन से ही क्रिसमस की खरीददारी शुरू हो जाती है और क्रिसमस पर परिवार में सभी को उपहार देने की परम्परा है तो भारी छूट के साथ सभी खरीददारी करना पसन्द करते हैं। कुछ लोग तो साल भर की खरीददारी इन्हीं दिनों कर लेते हैं। हमारे भारतीय भी इन्हीं दिनों का इंतजार करते हैं कि देश के लिये उपहार अभी खरीदें। सारा बाजार चाइना के सामान से भरा था, ब्राण्ड कोई भी हो, सामान तो चाइना का ही था। हमने जितने भी स्टोर पर स्वटेर देखे, सारे ही एक से थे। लग रहा था कि मॉल चाहे किसी नाम के हो लेकिन एक ही फेक्ट्री से बना सामान यहाँ है। भारत में सर्दी के दिनों में बाजार शॉल से अटे पड़े रहते हैं लेकिन यहाँ इनका नामोनिशान नहीं था, हाँ कुछ स्टॉल जरूर थे। मफलर और केप खूब थे। भारी-भारी कोट जिसमें बर्फिली सर्दी भी थम जाए, खूब बिक रहे थे, लेकिन भारत जैसी जगह के लिये पतले-पतले स्वेटर ही काफी थे।
यहाँ का सबसे बड़ा त्योहार है – क्रिसमस और यह थैंक्स गिविंग के दूसरे दिन से ही शुरू हो जाता है। सारा शहर रोशनी से सजने लगता है। घरों के बाहर तरह-तरह की आकृतियां सजने लगती हैं। ऐसा कोई घर नहीं जहाँ रोशनी ना हो। यह रोशनी सवा महिने तक बनी रहेगी। घर-परिवार, रिश्तेदार और सभी मिलने वालों के लिये उपहार खरीदे जाएंगे और एक महिने का यहाँ समय फुल मस्ती के साथ व्यतीत करेंगे। ऑफिसों में छुट्टी का माहौल बना रहता है और अक्सर भारतीय भी अपने देश आने के लिये इन्हीं दिनों में छुट्टियां लेते हैं। लेकिन परिवार सहित हम अमेरिका में रहने वाले हैं और रोज का आँखों देखा हाल आपको सुनाने वाले हैं। बस एक बात का ध्यान रखिये की हम संजय की भूमिका में है, जो सामने है, उसे बता रहे हैं, इसे हमारी पसन्द और नापसन्द से ना जोड़े। जब अवसर अएगा हम वह भी विश्लेषण करेंगे। अभी तो केवल रनिंग केमेण्ट्री।

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