अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

मोगली को मनुष्य बताने में गलत क्या है?

Written By: AjitGupta - Sep• 22•18

मोगली की कहानी तो आपको याद ही होगी, क्या कहा, ध्यान नहीं है! जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहनके फूल खिला है, याद आ गयी ना। तो एक कहानी थी कि एक मनुष्य परिवार का बच्चा जंगल में गुम हो गया। भेड़ियों के झुण्ड को वह बच्चा मिलता है और वे उसे पालने का निश्यच करते हैं। बच्चा भेड़ियों के बीच बड़ा होने लगता है और बच्चा खुद को भी भेड़िया ही समझने लगता है। जंगल के शेर आदि दूसरे प्राणी जानते हैं कि यह मनुष्य का बच्चा है और हमेशा इस ताक में रहते हैं कि कब अवसर मिले और हम इसका शिकार कर लें लेकिन मोगली नहीं समझता की मैं मनुष्य का बच्चा हूँ। मोगली की भेड़िया माँ भी जानती है कि मोगली मनुष्य का बच्चा है लेकिन वह भी उसे नहीं बताती। एक दिन जंगल में एक मनुष्य जा पहुँचा, उसने मोगली को देखा और कहा कि अरे तुम मनुष्य के बच्चे हो और यहाँ भेड़ियों के बीच क्या कर रहे हो! मोगली कहता है कि नहीं मैं तो भेड़िया ही हूँ। मनुष्य उसे समझाने की कोशिश करता है कि देख तेरे दो हाथ और दो पैर हैं, मेरे जैसे। तू बोल सकता है, मेरे जैसे। मनुष्य उसे सबकुछ बताता है, लेकिन मोगली नहीं मानता। तभी भेड़िये भी आ जाते हैं और मोगली को समझने नहीं देते। मनुष्य कहता है कि देख मैं तुझे बता रहा हूँ कि तू मेरे जैसा है, तेरे पिता और मैं एक जैसे ही हैं। तू हिंसक नहीं है, इन भेड़ियों की तरह शिकार नहीं कर सकता। तू मेरे साथ शहर में चल। मोगली कहता है कि नहीं, मैं तुम्हारे साथ नहीं जाऊंगा क्योंकि मुझे पता है कि मनुष्य बहुत खतरनाक होता है और तुम मुझे भी मार दोगे। मनुष्य उसे फिर समझाने की कोशिश करता है कि मैं यदि तुझे मार दूंगा याने मनुष्य होकर मनुष्य को मार दूंगा तो मैं मनुष्य कैसे रहूंगा? मैं भी फिर भेड़िया ही बन जाऊंगा ना!
मोगली ने उसकी बात ध्यान से सुनी और भेड़ियों की तरफ देखा, भेड़ियों ने कहा कि तू इसकी बात में मत आ, यह मनुष्य बहुत खतरनाक होते हैं। तुझे अवश्य मार देंगे। हम सब मिलकर इन्हें मारेंगे और सबके डर को समाप्त करेंगे, तू हमारे साथ ही रह। जब मोगली भेड़ियों के साथ जाने लगा तो मनुष्य ने कहा कि देख मैं तुझे फिर कह रहा हूँ कि तू मनुष्य है यदि तूने मेरी बात नहीं मानी और इन भेड़ियों के साथ मिलकर मनुष्यों को समाप्त करने के सपने देंखे तो फिर मैं इन भेड़ियों को तो समाप्त करूंगा तुझे फिर समझ आएगा कि तू वास्तव में क्या है। यह कहकर मनुष्य शहर में लौट गया। जंगल में सन्नाटा छा गया, मोगली क्या शहर लौट जाएगा? यह प्रश्न हर प्राणी की जुबान पर था। शहर में भी हलचल मच गयी कि मोगली को यह मनुष्य अपने जैसा कहकर आया है, जबकि अब वह हमारे जैसा रहा ही नहीं। लोगों में डर बैठ गया, चारों तरफ चर्चा होने लगी कि आखिर मोगली हमारे जैसे कैसे है! कैसे मनुष्य ने कहा कि इसको मारने से मनुष्यत्व समाप्त हो जाएगा। यह तो हम मनुष्यों के साथ सरासर अन्याय है। हम बरसों से भेड़ियों का आतंक झेलते रहे हैं और अब यह मनुष्य मोगली को कहकर आया है कि तुम हमारे जैसे हो! नहीं यह हो नहीं सकता, हम मनुष्य को ऐसा नहीं करने देंगे। जंगल में चर्चा थी कि यदि मोगली चले गया तो हम भेड़ियों का यह दावा खारिज हो जाएगा कि मनुष्य सब पर अत्याचार करता है इसलिये हम इसका शिकार करते हैं। उधर शहर में यह चिंता थी कि मोगली यहाँ आ गया तो वह हमारे साथ रहकर हमें मारेगा, आखिर वह भेड़िया ही तो है।
आज यदि हम कहें कि ऐसे लोग जिनके और हमारे पूर्वज एक थे, साथ आ जाओ और देश को सुंदर बनाने में सहयोगी बन जाओ तो क्या गलत है? यदि कोई भेड़ियों के साथ रह रहे मोगली को कहे कि तुम हमारे जैसे ही मनुष्य हो तो क्या गलत है? भेड़ियों ने मोगली को कहा कि तुम हमारे जैसे हो इसलिये इंसान का खून करो लेकिन यदि मनुष्य कह रहा है कि नहीं मोगली तुम मेरे जैसे हो तो क्या गलत है? शहर के सभ्य लोगों समझों उस मनुष्य की बात जो मोगली को मनुष्य बताकर उसकी हिंसा समाप्त करना चाहता है, उसे देश निर्माण में भागीदार बनाना चाहता है। हमेशा की हिंसा और रक्तपात को मिटाना चाहता है तो गलत क्या है?

You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *