अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

राजनीति से भी बाहर आ जाओ ना

Written By: AjitGupta - Apr• 26•19

टीवी रूम में रिमोट के लिये हर घर में उठापटक मची रहती है, घर के मर्द के पास रिमोट ना हो तो मानो मर्दानगी ही रुक्सत हो गयी हो, ऐसे में घर की स्त्री भी किसी ना किसी बहाने आँख दिखाकर रिमोट पर कब्जा करती दिख ही जाती है, बच्चे तो रिमोट पर अपना हक ही जमा बैठते हैं और नहीं मिले तो ऐसा कोहराम मचा देते हैं कि फिर कैसा टीवी और कैसे चैनल? लेकिन कल मैं हतप्रभ रह गयी, इतनी हतप्रभ हुई की ईवीएम मशीन तक जा पहुँची। सोचने लगी कि जब रिमोट किसी ओर से संचालित होता है तो ईवीएम भी हो सकती है! हुआ यूँ कि मेरा टाट स्काई का रिमोट ढंग से काम नहीं कर रहा था, इंस्टाल करने वाले बन्दे ने टीवी और सेटअप बॉक्स के रिमोट को पेयर बना दिया था और हम एक ही रिमोट से काम चला रहे थे। लेकिन अचानक ही यह गठबन्धन टूट गया। कहाँ तो चुनावी मौसम में गठबन्धन हो रहे हैं लेकिन मेरे रिमोट का टूट गया। कई महिनों से टीवी का रिमोट अल्मारी में बन्द पड़ा ऑक्सीजन की तलाश में था तो उसे नसीब हो गयी। लेकिन केवल ऑन-ऑफ का मसला नहीं था, सेटअप बाक्स का रिमोट तो ठुमक-ठुमक कर चलने लगा, शत्रुघ्न सिन्हा की तरह हर पल नाराज रहने लगा, कभी चैनल ना बदले जाएं और कभी वोल्यूम बन्द हो जाए। गूगल के सारे प्रयोग भी फैल हो गये। आखिर मौहल्ले में स्थित टाट स्काई के डीलर से सहायता की अपील की। उसने दोनों रिमोट को पास बुलाया, बातचीत कराने की कोशिश की लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी, लगा कि दिल्ली में केजरीवाल और कांग्रेस का मेल-मिलाप नहीं हो सकता। डीलर ने हाथ झटक लिये। अब सोचा कि टाटा स्काई हेल्प का सहारा लिया जाए। हेल्प का फोन लग गया और बन्दे से बात होने लगी।
बन्दा बोल रहा था कि मैं चेक करके बताता हूँ, अरे रिमोट तो मेरे हाथ में है, भला तू कैसे चेक कर सकेगा! खैर दीमाग को शान्त किया और वह बोलता गया और मैं सुनती गयी। उसने भी दोनों रिमोट का मेल-मिलाप कराने का अथक प्रयास किया, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। अब बोला की मैंने आपकी शिकायत नोट कर ली है और शीघ्र ही आपको एक फोन आएगा और समस्या सुलझ जाएगी। मेसेज भी आ गया कि शिकायत बुक हो गयी है। लेकिन बुद्धीजीवी चुपचाप नहीं बैठ सकता, उसे लगता है कि मैं क्यों नहीं ठीक कर सकता! इस बार मैंने यू-ट्यूब खोली और एक वीडियो मिल गया, कैसे पेयर बनाये। दिखाया जा रहा था कि दोनों रिमोट को आमने-सामने बिठाएं फिर यह बटन दबाये और फिर यह। लो अब बन गया पेयर। सप्तपदी की रस्म पूरी हुई लेकिन मेरे रिमोट को यह आर्यसमाजी विवाह पसन्द नहीं आया और उसने फिर नकार दिया। मैं भी हार-थककर चुप हो गयी। कुछ देर में ही फिर एक मेसेज आया कि आपकी समस्या निवारण के लिये शीघ्र ही आपसे फोन पर वार्ता की जाएगी। एकाध घण्टा बीत गया, हमारे यहाँ भी रिमोट को हाथ में पकड़कर अधिकार रखने की आदत नेपथ्य में चले गयी थी। पतिदेव को तो समझ ही नहीं आ रहा था कि किस रिमोट से टीवी चलेगा और किस से बन्द होगा तो हमेशा मर्दानगी दिखाने का मौका नहीं चूकने वाले आज रिमोट से दूर ही थे। लेकिन कुल मिलाकर दो-तीन घण्टे बाद आदत से लाचार मैंने जब रिमोट का मुआयना किया तो वह चल उठा, मैं भी उछलकर बैठ गयी कि अरे यह चल गया! मैंने सोचा कि मेरे प्रयोग से ही चला होगा लेकिन तभी फोन के मेसेज पर निगाह पड़ी, उसमें मेसेज था कि आपकी समस्या का निवारण कर दिया गया है। लो कर लो बात रिमोट मेरा, लेकिन संचालित हो रहा है टाटा स्काई को दफ्तर से! हम घर में बिना बात ही झगड़ते हैं कि रिमोट मेरे पास या तेरे पास, लेकिन यह मरा तो किसी और के पास है। न जाने कितना कुछ है दुनिया में जिनके लिये हम हर पल लड़ते हैं लेकिन हमारे हाथ खाली हैं, डोर तो न जाने किसके पास है! हम रंगमंच की कठपुतली हैं जी, डोर तो विधाता के पास ही है। आपने भी न जाने क्या सोचकर यहाँ तक पढ़ लिया क्योंकि मेरे लेखन की डोर भी आपके पास ही है, आप पढ़ेंगे तो ही मैं लिख सकूंगी नहीं तो क्या रखा है इस लेखन में। और हाँ, वोट जरूर डालना।

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