अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

सौगात किस-किस ने भेजी!

Written By: AjitGupta - Apr• 28•19

मैं चोरी-छिपे तुझे सौगात भेजूँ और तू है कि सबको ढोल बजाकर बता दे कि दीदी ने सौगात भेजी है! तू देख, अब मैं तुझे कंकर वाले लड्डू भेजूंगी। 
दीदी नाराज क्यों होती हो? कोई भी सौगात भेजे तो उसे बताने पर तो उसका सम्मान ही बढ़ता है ना! कहीं ऐसा तो नहीं है कि एक तरफ तुम मंचों से गाली देती हो और अन्दर ही अन्दर रिश्ता बनाकर भी रखना चाहती हो! मोदीजी भी गजब करते हैं, क्या जरूरत थी पोल खोलने की! हँसते-हँसते इतनी बड़ी पोल खोल दी। हम तो समझते थे कि मोमता दीदी केवल गाली ही भेजती हैं, हमें क्या पता था कि चुपके-चुपके मिष्ठी दही भी भेजती हैं। गाली गिरोह का सरगना ही सौगात भेज रहा है तो फिर बाकि क्या करते होंगे जी! मोदीजी के घर की तलाशी लेनी चाहिये, उनकी सौगातों पर भी निगाह रखनी चाहिये। राहुलवा क्या भेजता है, जरा यह भी बता ही देते, लगे हाथ! वो कंजरवाल भी कुछ भेजता है या वह शुद्ध फोकटवा ही है! देखो मोदीजी छिपाना मत, लालू ने तो जरूर ही कुछ भेजा होगा, वह बेचारा तो जैल में पड़ा है। अखिलेश क्या भेज सकता है? आम के टोकरे भेज रहा होगा, सुना है उत्तर प्रदेश में आम खूब होता है। शरद पँवार तो एलफेंजो भेजते ही होंगे। मोदीजी एक बात बताओ कि जब आपके दुश्मन इतनी सौगातें भेजते हैं तो मित्र कितनी भेजते होंगे! 
आपके पीएमओ में तो बहार छायी रहती होगी, तभी सारे अधिकारी खुश हैं, कोई बात नहीं 18 घण्टे काम करना पड़ता है तो क्या, कभी रसोगुल्ला तो कभी आम और कभी लीची मिलती ही रहती है। आप तो खिचड़ी खाकर काम चला लेते हैं लेकिन आपका स्टाफ तो मोमता दीदी के रसगुल्ले खा रहा है! लेकिन क्या सच में दीदी अब कंकर के लड्डू बनाकर भेजेगी? चुनाव परिणाम आने के बाद बता ही देना कि क्या सच में कंकर के लड्डू आए या गणपति के मोदक आए? राहुलवा शिकायत कर रहा था कि मोदीजी मुद्दे को भटका रहे हैं। यह क्या बात हुई जो मुद्दे को सौगात पर ले आए? हमारी दादी और हमारे नाना के पास भी बहुत सौगातें आती थी। मेरे पास क्या आता है? यही पूछ रहे हैं ना आप? यही तो मैं कह रहा हूँ कि मोदीजी मुद्दे को भटका रहे हैं। मुझे चिढ़ा रहे हैं कि मेरा कुर्ता फटा हुआ होने के बाद भी मोमता जी ने मुझे कुर्ता नहीं भेजा और आपका मंहगा सूट होने के बाद भी आपको कुर्ता सौगात में मिला! मैं कैसे मुश्किल से दिन निकाल रहा हूँ, यह उन्हें पता नहीं है। भारत में एक बार चार हजार रूपये बैंक से निकाले थे, अब बैंक में रूपये भी नहीं है और कुर्ता भी फटा हआ है, मुझे भाग-भागकर लंदन जाना पड़ता है, पैसों का जुगाड़ करने। इतना कड़की होने के बाद भी कोई सौगात नहीं भेजता। कंजरीवाल का तो रो-रोकर बुरा हाल है कि मुझे तो सौगात के रूप में थप्पड़ ही मिलते हैं, मुझे तो बर्बाद ही कर डाला इस मोदी ने! युवा ब्रिगेड़ के तीसरे रत्न अखिलेश तो अपने पिताजी से ही सौगात नहीं पा रहे, बुआ के आसरे रह रहे हैं और बुआ को तो सारा जगत जानता है कि वहाँ चढ़ावा चढ़ता ही है, प्रसाद तक नहीं बँटता। 
चारों तरफ अफरा-तफरी मची है, कौन-कौन सौगात भेज रहा है, जरा पता लगाओ। वह इमरान पाकिस्तान में बैठकर कोई खेल तो नहीं खेल रहा है। साला यहाँ कौम के नाम पर उकसा रहा है और अन्दर ही अन्दर डर के मारे सौगात भेज रहा हो! सऊदी अरब वाले तो मन्दिर ही बनवा के दे रहे हैं, सौगात में! चीन ने अरूणाचल से हाथ खेंच लिये, कश्मीर से भी हरे झण्डे उतार लिये। यह हो क्या रहा है? सही कह रहा है राहुलवा कि चुनाव मुद्दों से भटक गया है! यह भी कोई चुनाव है! जब सारे ही प्रतिद्वंद्वी सौगात भेज रहे हैं, तो फिर कैसा चुनाव! राहुलवा ने अपनी बहन से कहा कि हट जा पगली तू भी मैदान से। हमने दस साल तक खेत के बेजूबान बिजुका को खड़ा रखकर पीएमओ चलाया है तो काशी में भी एक बिजुका खड़ा कर देंगे। लेकिन तू अपनी नाक बचा। बहना बोली की भाई मैं तो पतली गली से सरक लूंगी लेकिन तू अमेठी से कैसे सरकेगा? वहाँ तो शेरनी ताक में बैठी है। थोड़ी सौगात तू भी भेज दे ना! कुछ राहत तो मिले। वायनाड़ से भी पता नहीं क्या होगा? वहाँ भी कौन-कौन और क्या-क्या सौगात भेज रहे होंगे। चल माँ के पास चलते हैं। राहुलवा चीखकर बोला कि क्या होगा माँ के पास जाने से! वह तो कहेगी ही ना कि मैं तो पहले ही कह रही थी कि सत्ता जहर है, तू सौगात समझ बैठा! न हो तो चल नानी के घर ही चलते हैं। रूक जा, कुछ दिन बाद तो जाना ही है। देश में जब न्याय बँट रहा होगा तब चलेंगे।

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