अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

कहाँ सरक गया रेगिस्तान!

बचपन में रेत के टीले हमारे खेल के मैदान हुआ करते थे, चारों तरफ रेत ही रेत थी जीवन में। हम सोते भी थे तो सुबह रेत हमें जगा रही होती थी, खाते भी थे तो रेत अपना वजूद बता देती थी, पैर में छाले ना पड़ जाएं तो दौड़ाती भी थी और रात को […]

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