अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

लोहे के पेड़ हरे होंगे, तू गीत प्रेम के गाता चल

मेरी जिन्‍दगी कई मुकामों पर होकर गुजरी है। मैंने हमेशा स्‍वयं को टटोला है और पाया है कि बस मुझे आत्‍मीयता भरा वातावरण चाहिए, इसके अतिरिक्‍त और कुछ नहीं। शिक्षा लेने के बाद सरकारी नौकरी करना एक बाध्‍यता जैसा हो जाता है। उस समय हमें लगता है कि महिला के लिए नौकरी करना और अपने […]

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