अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

#TED याने टेकनोलोजी, एन्टरटेंटमेंट और डिजाइन

Written By: AjitGupta - Jan• 30•18

कल रिमोट को आगे-पीछे करते एक श्रेष्ठ कार्यक्रम पर आकर तलाश रूक गयी, देखा एक सम्भ्रान्त महिला अपने मन को दर्शकों के सामने अभिव्यक्त कर रही थी, पेशे से चिकित्सक थी और 71 वर्ष की आयु में भी दुनिया भर में अपनी सेवाएं दे रही थी, उनकी अन्तिम पंक्ति थी की मैं कभी रिटायर्ड नहीं होऊंगी। उनका बोलना नयी प्रेरणा दे रहा था लेकिन शायद समय सीमा से वे बंधी थी और जब उनकी बात समाप्त हुई तब सारे ही दर्शक उनके सम्मान में खड़े हो गये। मैंने उनके बारे में पहले कभी नहीं सुना था। इसके बाद आए जावेद अख्तर, उन्होंने शब्दों के रचना संसार की बात की। उन्होंने कहा कि मनुष्य और पशु-पक्षियों में एक ही अन्तर है और वह है शब्दों की दुनिया। मनुष्य शब्दों के माध्यम से अपनी विगत धरोहर को हम तक पहुंचाता है और हम स्वयं को जान पाते हैं कि हमारी विरासत क्या है। इसी प्रकार कुछ वैज्ञानिक, कुछ समाज शास्त्री कुछ कलाकारों ने अपनी बात कही। मैं अभिभूत थी, दिल में तीव्रता से उतरने वाला कार्यक्रम था। अभी गूगल सर्च में जाकर पता किया कि क्या है कार्यक्रम का उद्देश्य।
TED याने टेकनोलोजी, एन्टरटेंटमेंट और डिजाइन। इस क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों का प्लेटफार्म। रविवार को शाम 7 बजे स्टार प्लस पर आता है। कल शाहरूख खान होस्ट कर रहे थे। हो सके तो इसे अवश्य देखें। कार्यक्रम में जितने भी लोगों ने अपनी बात रखी उनमें से अधिकतर गुमनाम थे, वे दुनिया को ऐसा कुछ दे रहे हैं जो आज के पहले हमने कभी जाना नहीं। कितनी अजीब बात है कि हम फिल्मी कलाकारों को, खिलाड़ियों को जानते हैं लेकिन जो लोग हमारे जीवन को विज्ञान से आत्मसात कराते हैं उनके बारे में नहीं जानते, जो कला के माध्यम से स्वयं को अभिव्यक्त होना सिखाते हैं, उनको हम नहीं जानते और जो नयी दुनिया बना देते हैं हम उन्हें नहीं जानते। दुनिया में इन क्षेत्रों में कितना कार्य हो रहा है, हम इन सबसे अनजान है बस खेल के मैदान पर कब मैच हार गये और कब जीत गये उसी का गम और खुशी मनाते रहते हैं या कौन सी फिल्म में किसने क्या रोल किया है, उसी पर सारा ध्यान केन्द्रित रखते हैं लेकिन दुनिया में कितना कुछ हो रहा है उसपर चर्चा भी नहीं करते। यदि हम बड़े कामों पर ध्यान केन्द्रित करेंगे तब फिल्म और खेल हमारे लिये चिन्ता का विषय नहीं होंगे और ना ही किसी ने क्या कह दिया और मीडिया किस पर हल्ला मचा रहा है यह हमारे लिये मायने नहीं रखेगा।
जब हम एक साधारण व्यक्ति की उड़ान देखते हैं और साधारण तरीके से उसने समाज को क्या दे डाला है तब हम प्रेरित होते हैं कि हम भी कुछ कर सकते हैं, लेकिन आज जो मीडिया द्वारा रचित विवाद हैं उसमें हम भी केवल विवाद करने वाले बनकर रह गये हैं। रचना का संसार हमसे पीछे छूट गया है और हम सब खरपतवार सरीखे बन गये हैं, जिसकी जरूरत किसे भी नहीं है। हम यहाँ शब्दों को गढ़ने वाले लोग हैं, शब्दों का विशाल संसार हमारे पास होना चाहिये जिससे हम अपनी बात कह सकें साथ में दृष्टि भी होनी चाहिये कि हमें दुनिया को क्या नया देना है। दुनिया में जो है उसी को हमने परोस दिया तो वह सृजन नहीं है, वह तो नकल है। इसलिये शब्दों के भण्डार का भी विस्तार करे और अपनी दृष्टि का भी। कोशिश करें कि जो हम देख रहे हैं, वह नया हो, उसकी अभिव्यक्ति भी नयी हो, तब हमारे लेखन का भी औचित्य होगा नहीं तो नकल की राह पर हम चल पड़ेंगे। आप आगामी रविवार को कार्यक्रम देखें, हो सकता है आपको भी प्रेरित कर जाए। मेरा तो दिल से आभार।

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