अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

Archive for the 'ब्‍लाग जगत' Category

मन से पंगा कैसे लूँ, यह अपनी ही चलाता है – अजित गुप्‍ता

यह मन भी क्‍या चीज है, न जाने किस धातु का बना है? लाख साधो, सधता ही नहीं। कभी लगता है कि नहीं हमारा मन हमारे कहने में हैं लेकिन फिर छिटककर दूर जा बैठता है। अपने आप में मनमौजी होता है “मन”। ना यह हमारी परवाह करता है और ना ही हम इसकी परवाह […]

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क्‍या आपको भी आपके दिमागी कीड़े (neurons) उकसाते हैं टिप्‍पणी करने पर

मुझे जब से आप लोगों की संगत मिली है और जैसे-जैसे दुनियादारी की समझ बढ़ी है तभी से अपने दिमाग के न्‍यूरोन्‍स से बहुत सचेत रहती हूँ। कमबख्‍त कब बगावत कर दें? अच्‍छी खासी किसी की पोस्‍ट पढ़ रही होती हूँ कि यह न्‍यूरोन्‍स रूपी कीड़ा दिमाग में कुलबुलाने लगता है और मुझे उकसाना शुरू […]

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क्‍या ब्‍लाग-जगत भी चुक गया है?

दो चार दिन से ब्‍लाग जगत में सूनापन का अनुभव कर रही हूँ। न जाने कितनी पोस्‍ट पढ़ डाली लेकिन मन है कि भरा ही नहीं। अभी कुछ दिन पहले तक ऐसी स्थिति नहीं थी। दो चार पोस्‍ट तो ऐसी होती ही थी कि दिन भर की तृप्ति दे जाती थी। किसी को सुनाने का […]

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