अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

Archive for the 'सुन्‍दरता' Category

सुन्‍दरता तू दुखी क्‍यूं है?

बात बहुत पुरानी है, लेकिन अभी भी अस्तित्‍व में है। मेरे परिचय में एक महिला थी, उनका दावा था कि वे किसी भी आत्‍मा को बुलाकर उससे भविष्‍य लिखा सकती हैं। वे कलम पकड़ती थी और बस कलम अपने आप लिखने लगती थी। लेखकों के साथ भी तो यही होता है, हम कब सोच समझकर […]

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विवाहित युवतियां आखिर अविवाहित क्‍यों दिखना चाहती हैं? – अजित गुप्‍ता

बहुत दिनों पूर्व एक कहानी पढ़ी थी, अकस्‍मात उसका स्‍मरण हो आया। कहानी कुछ यूँ थी – एक व्‍यक्ति एक गाँव में जाता है, एक परिवार का अतिथि बनता है। उस परिवार में विवाह योग्‍य एक लड़की है लेकिन वह बहुत ही कमजोर और बीमार से थी इस कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा […]

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