अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

हम और आप सभी किसी न किसी क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं

Written By: AjitGupta - Nov• 08•13

आप सभी किसी न किसी क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं, बस आपको इसकी पड़ताल ही नहीं है। आप अपने परिवार को गौर से देखिए, उसका अध्‍ययन कीजिए तब आपको पता लगेगा कि आपके परिवार में प्रत्‍येक व्‍यक्ति अपनी विधा का माहिर है। इसी प्रकार प्रत्‍येक परिवार में न जाने कितने विशेषज्ञ रहते हैं, बस हमारी दृष्टि ही उनतक नहीं पहुंचती है। एक विद्वान ने बताया कि प्रत्‍येक व्‍यक्ति के व्‍यक्तित्‍व के 10 नम्‍बर होते हैं, ये नम्‍बर सभी में समान होते हैं, ना किसी में कम और ना किसी में ज्‍यादा। बस हमारा आकलन ही हमें इन नम्‍बरों रूपी विशेषताओं तक नहीं ले जाता। सभी की अपनी रुचियां होती हैं, कोई अध्‍ययनशील तो कोई व्‍यापारी, कोई पाकशास्‍त्री तो कोई अतिथिसेवी, कोई परामर्शदाता तो कोई व्‍यवहारकुशल। कोई बुजुर्गों की सेवा में माहिर तो कोई बच्‍चों को साधने में माहिर, कोई खिलाड़ी तो कोई हुनरबाज। ऐसे ही अनेकानेक गुण हम सब में अन्‍तर्निहीत हैं बस हमें ही उसका पता नहीं है। जब भी परिवार में सामाजिक कार्य आयोजित होते हैं तब व्‍यक्ति की पहचान होती है। इसी प्रकार अपने कार्यस्‍थल पर भी विभिन्‍न आयोजनों के माध्‍यम से ही व्‍यक्ति की योग्‍यता की पहचान की जाती है।

परिवार में विवाह समारोह है, आप जब नेगचार की बात सोचते हैं तब अचानक ही आपको बुआ याद आ जाती है, सभी कहने लगते हैं कि बुआजी को पहले ही बुलालो, उनके बिना तो कुछ हो नहीं सकेगा। समधियों से सम्‍मानजनक वार्तालाप के लिए आपको घर का कोई बड़ा भाई या ताऊजी याद आ जाते हैं। भोजन की व्‍यवस्‍था देखने के लिए भी कोई विशिष्‍ट व्‍यक्ति का स्‍मरण होता है। लेनदेन का परामर्श देने के लिए फला व्‍यक्ति ठीक रहेगा, मन में निश्चित कर लेते हैं। ऐसे ही मेंहदी लगाने से लेकर गीत गाने तक और वस्‍त्र से लेकर आभूषणों का चयन करने में भी आपको विशेषज्ञ व्‍यक्ति दिखायी दे ही जाता है। समारोह सम्‍पन्‍न होने के बाद अक्‍सर लोग कहते हुए दिखायी भी दे जाते हैं कि मेरे बिना तो उनका फला काम होता ही नहीं। बस उनके  नाम की धाक जम जाती है और वे उसी काम के विशेषज्ञ बनकर समाज और परिवार में पहचाने जाते हैं। आप सही सोच रहे हैं, कई निठल्‍ले भी होते हैं, वे बस गप मारने के ही काम आते हैं, लेकिन यह भी आवश्‍यक है। कई झगड़ेबाज होते हैं, कभी-कभी ये भी आड़े वक्‍त में काम आ जाते हैं। अब आप कल्‍पना कीजिए कि किसी परिवार में विशेषज्ञों की भूमिका को बदल दिया जाए तो क्‍या होगा! पाकशास्‍त्री को यदि अन्‍य कार्य सौंप दिया जाएगा तब शायद वह उस कार्य को इतनी दक्षता के साथ नहीं कर सके और क्‍या होगा? लोग कहेंगे कि यह व्‍यक्ति योग्‍य नहीं है। ऐसे ही किसी अन्‍य को पाकशास्‍त्री बना दिया जाए तो लोग कहेंगे कि इसे कुछ नहीं आता। इसलिए हम सब की प्रवीणता भी इसी में हैं कि हम योग्‍य वयक्तियों की पहचान करें।

ऐसी ही सम्‍भावनाएं शिक्षा और रोजगार चयन में होती है। शिक्षा का चयन कैसे करें, इसके लिए माता-पिता और गुरु को किशोरों को मार्गदर्शन देना चाहिए। वर्तमान में शायद ही कोई ऐसे माता-पिता हों जो संतान की रुचि और उसके गुण को देखकर उसकी शिक्षा का चयन करते हों, सभी समाज में प्रतिष्‍ठा के विषयों का ही चयन करते दिखायी देते हैं। जब किसी विद्यार्थी के विज्ञान में नम्‍बर कम आते हैं तब हम उसे कमजोर कह देते हैं, उसे हीनबोध का शिकार बना देते हैं। लेकिन वो ही विद्यार्थी यदि अन्‍य विषय जो उसकी रुचि का है ले लेता है तब उसमें वह कीर्तिमान स्‍थापित करता है तब हम कहते हैं कि बड़ा होशियार है। इसलिए योग्‍यता और अयोग्‍यता का आकलन विषयवार शिक्षा से नहीं होता है। हमें बचपन से ही अपनी संतान का अध्‍ययन करना चाहिए और निश्चित करना चाहिए कि इसकी रुचि क्‍या है, इसमें क्‍या गुण निहीत हैं। आप द्वारा थोपी गयी शिक्षा व्‍यक्ति को असफल बना देती है और फिर वह हीनबोध का शिकार बन जाता है। कभी-कभी मानसिक रोगी तक बन जाता है। इसलिए शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो उसके गुणों का विस्‍तार करे और उसे परिष्‍कृत कर सके। इसी प्रकार रोजगार तलाशते समय भी हमें सावधानी बरतनी चाहिए। आप किस वातावरण में अधिक आरामदायक अनुभव करते हैं वैसा ही वातावरण तलाशना चाहिए। विपरीत वातावरण क्‍लेश का ही कारण बनते हैं। कुछ लोग सरकारी नौकरी में खुश रहते हैं तो कुछ प्राइवेट क्षेत्र में। कुछ बड़े कार्यक्षेत्र में खुश हैं तो कुछ छोटे कार्यक्षेत्र में। कुछ एक ही जगह बैठकर कार्य करना पसन्‍द करते हैं तो कुछ भ्रमण करना पसन्‍द करते हैं। ऐसे ही अनेक प्रकार हैं जब हम अपने मन की गति को ढूंढ सकते हैं। हमारे यहाँ तो अध्‍यात्‍म का मूल ही है कि स्‍वयं को खोजो। और यह स्‍वयं की खोज बचपन से ही प्रारम्‍भ हो जानी चाहिए। जब हम अपनी योग्‍यताओं को खोज लेते हैं तब अपने लिए सफलता का मार्ग भी तलाश लेते हैं। इसलिए सभी व्‍यक्ति योग्‍य हैं बस उन्‍हें उनकी योग्‍यता का कार्य करने दीजिए। कोई नेतृत्‍व करता है तो कोई कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर सकता है, अब इन दोनों को उलट दीजिए। क्‍या होगा? इसलिए बस तलाशिए सम्‍भावनाएं, जो आपके अन्‍दर हैं और आपके बच्‍चों में हैं। उनपर अपना दृष्टिकोण मत थोपिए की यह तो ऐसा ही है। इसलिए आप भी विशेष हैं और किसी न किसी क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं, बस आपने कभी स्‍वयं को खोजा ही नहीं।

You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

10 Comments

  1. आलेख का सकारात्मक दृष्टिकोण प्रभावित करता है। अपने आसपास विशेषज्ञता वाले यह प्रयोग कर इनकी सफलता को महसूस करती हूँ !

  2. बहुत ही सटीकता से बात कही आपने, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

  3. Shikha Varshney says:

    बहुत अच्छी बात कही है आपने। हर व्यक्ति विशेषज्ञ होता है.
    सामान्यत: हम किसी भी व्यक्तिगत गुण को व्यवसायिक गुण में भी परिवर्तित कर सकते हैं. बहुत दिनों से मन है इस विषय पर लिखने का.

  4. हर व्यक्ति विशेष है …. बस ज़रूरत है सही योग्यता पहचानने की …. बच्चों पर आज कल ज्यादा ही अपनी अपेक्षाएँ थोप देते हैं माता पिता …. बहुत सार्थक लेख …

  5. सच है ,सब में कोई न कोई गुण छुपा होता है, बस पहचानने की देर है .

  6. rohit says:

    बात सटीक कही है आपने..आजकल अपने को खोज रहा हूं…देखिए क्या होता है.

  7. ये तो भली कही आपने। आप इसकी विशेषज्ञ हैं! 🙂

  8. डॉक्टर दीदी!
    बहुत सी कहा आपने.. और मैंने तो फ्लैश बैक में जाकर सोचा.. फूफा जी भण्डार संभाल लेते थे, मामा जी पैसों का हिसाब रखते थे, भैया मेहमानों को रिसीव करते थे.. ये विशेषता सब में अलग-अलग होती थी!! मगर सब माहिर!!

  9. हम भी खोज देखते हैं अगली फ़ुरसत में।

  10. AjitGupta says:

    आप सभी का आभार। मेरी नयी पोस्‍ट आपके इन्‍तजार में है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *