अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

Archive for the 'Uncategorized' Category

शेर की किरकिरी

शेर और शेर के बच्चों से परेशान होकर मैंने सच्चे शेर की तलाश में नेशनल ज्योग्राफी चैनल पर दस्तक दे दी। खोलते ही जो दृश्य था वह बता दूं – एक संकरा सा रास्ता था, सड़क बनी थी, कार खड़ी थी और वहाँ काँपते पैरों से एक भैंस का बच्चा घूम रहा था। एंकर बोल […]

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लुंज-पुंज से लेकर छूट और लूट की दुकान

आज एक पुरानी कथा सुनाती हूँ, शायद पहले भी कभी सुनायी होगी। राजा वेन को उन्हीं के सभासदों ने मार डाला, अराजकता फैली तो वेन के पुत्र – पृथु ने भागकर अपनी जान बचाई। पृथु ने पहली बार धरती पर हल का प्रयोग कर खेती प्रारम्भ की, कहते हैं कि पृथु के नाम पर ही […]

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जी-हुजूरियें आखिरी दाँव ढूंढ रहे हैं

बात 90 के दशक की है, हमारे कॉलेज में जब परीक्षाएं होती थी तब परीक्षा केन्द्रों पर सारे ही अध्यापकों की ड्यूटी लगती थी, लेकिन मेरी कभी नहीं। मैं सोचती थी शायद महिला होने के कारण मुक्ति मिल जाती होगी लेकिन फिर बाद में महिला होने के कारण ही लगने लगी, क्योंकि परीक्षा तो बालिकाएं […]

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औरंगजेब के काल की याद आ रही है

पिछले कई दिनों से रह-रहकर औरंगजेब के काल की याद आ रही है, देश के किसी मन्दिर को बक्शा नहीं गया था और ना ही ऐसी कोई मूर्ति शेष रही थी जो तोड़े जाने से बच गयी हो। घर में भी पूजा करना दुश्वार हो गया था, लोग चोरी-छिपे पूजा करते थे और खुश हो […]

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हर मन में हमने हिंसा को कूट-कूटकर भर दिया है

यह शोर, यह अफरा-तफरी मचाने का प्रयास, आखिर किस के लिये है? एक आम आदमी अपनी रोटी-रोजी कमाने में व्यस्त है, आम गृहिणी अपने घर को सम्भालने में व्यस्त है, व्यापारी अपने व्यापार में व्यस्त है, कर्मचारी अपनी नौकरी में व्यस्त है लेकिन जिन्हें खबरे बनाने का हुनर है बस वे ही इन सारी व्यस्तताओं […]

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