अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

Archive for the 'Uncategorized' Category

सेल्यूट अमेरिका को

अमेरिका में एक दिन बेटा डाक देख रहा था, अचानक उसके माथे पर चिन्ता की लकीरे खिंच गयी, मैंने पूछा कि क्या खबर है? उसने बताया कि सरकारी चिठ्ठी है, अब तो मेरा भी दिल धड़कने लगा कि यहाँ अमेरिका में सरकारी चिठ्ठी का मतलब क्या है? लेकिन जब उसने बताया तो देश क्या होता […]

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सभ्य बने या बने खरपतवार?

आपने कभी खेती की है? नहीं की होगी लेकिन बगीचे में कुछ ना कुछ उगाया जरूर होगा, चाहे गमले में ही फूल लगाया हो। जैसे ही हम बीज या पौधा लगाते हैं, साथ में खरपतवार भी निकल आती हैं और हम उन्हें चुन-चुनकर निकालने लगते हैं, खरपतवार खत्म होने पर ही फल या फूल बड़े […]

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ताजी रोटी – बासी रोटी

यदि आपके सामने बासी रोटी रखी हो और साथ में ताजी रोटी भी हो तो आप निश्चित ही ताजी रोटी खाएंगे। बासी रोटी लाख शिकायत करे कि मैं भी कल तुम्हारे लिये सबकुछ थी लेकिन बन्दे के सामने ताजी रोटी है तो वह बासी को सूंघेगा भी नहीं। जब दो दिन पहले भारत याने अपने […]

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सच के दो चेहरे – मुक्ति भवन फिल्म की पड़ताल

कई दिनों से मुक्ति भवन की कहानी दिमाग में घूम रही है, न जाने कितने पहलू पर विचार किया है, किसके क्या मायने हैं, समझने की कोशिश कर रही हूँ। इसी उधेड़बुन में अपनी बात लिखती हूँ, शायद हम सब मिलकर कोई नया अर्थ ही ढूंढ लें। एक फिल्म बनी है – मुक्ति भवन, वाराणसी […]

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मेक्सीकन जरूरत भी हैं और चुनावी मुद्दा भी

नेता बनने के लिये एक मुद्दा चाहिए, बस ऐसा मुद्दा जो जनता को भ्रमित करने की ताकत रखता हो, बस ऐसा मुद्दा ढूंढ लीजिये और बन जाइए नेता। अमेरिका में भी भारत की तरह ही मुद्दे ढूंढे जाते हैं। भारत में मुम्बई में कहा गया कि यूपी-बिहार के लोगों के कारण मराठियों की शान में […]

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