अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

Archive for the 'Uncategorized' Category

जन्मतारीख का गड़बड़झाला!

हमारा जमाना भी क्या जमाना था! बचपन में पाँच साल तक घर में ही धमाचौकड़ी करो और फिर कहीं स्कूल की बात माता-पिता को याद आती थी। स्कूल भी सरकारी होते थे और बस घर में कोई भी जाकर प्रवेश करा देता था। हमारे साथ भी यही हुआ और हमारी उम्र के सभी लोगों के […]

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बात इतनी सी है

हमारे राजस्थान का बाड़मेर क्षेत्र बेटियों के लिये संवेदनशील नहीं रहा था, यहाँ रेगिस्तान में अनेक कहानियों ने जन्म लिया था। बेटियों को पैदा होते ही मार दिया गया, या फिर ढोर-डंगर की तरह ही पाला गया। जैसे-तैसे बड़े हो जाओ और शादी करके चूल्हे-चौके में घुस जाओ। ना कोई शिक्षा और ना ही कोई […]

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महिला से हटकर पुरुष की अभिव्यक्ति

मेरा मन करता है कि मैं दुनिया को पुरुषों की नजर से देखूं लेकिन देख नहीं पाती हूँ! क्यों नहीं देख पाती क्योंकि मेरे पास पुरुष की सोच नहीं है और ना ही पुरुष की सोच क्या है, यह किसा किताब से अनुभव मिला है! पुरुष स्वयं को कम ही अभिव्यक्त करते हैं, उनके दर्द […]

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तिनके का सहारा

कहावत है कि “डूबते को तिनके का सहारा”, जीवन का भी यही सच है। हम दुनिया जहान का काम करते हैं लेकिन जीवन में तिनका भर सहारे से हम तिरते जाते हैं, तिरते जाते हैं। हमारे सामने यदि तिनके जितना भी सहारा नहीं होता तो हम बिखरने लगते हैं, इसलिये डूब से बचने के लिये […]

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छिपे रुस्तम हो गुरु आप!

अहा! ये कॉपी-पेस्ट करने की छूट भी कितनों को ज्ञानी बना देती है! बिना शिक्षक के ही हम ज्ञानवान बनते जाते हैं, नहीं-नहीं, ज्ञानवान नहीं बनते अपितु दिखते ज्ञानवान जैसे ही हैं। लोग भ्रम में जीते हैं कि जो हम पढ़ रहे हैं, वह इसी ने लिखा है! विश्वास नहीं होता लेकिन रोज-रोज के ज्ञान […]

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