अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

Archive for the 'Uncategorized' Category

पाई-पाई बचाते हैं और रत्ती-रत्ती मन को मारते हैं

कल ज्वैलर की दुकान पर खड़ी थी, छोटा-मोटा कुछ खरीदना था। मुझे जब कुछ खरीदना होता है तब मैं अपनी आवश्यकता देखती हूँ, भाव नहीं। मुझे लगता है कि भाव देखकर कुछ खरीदा ही नहीं जा सकता है। अपना सामान खरीदते हुए ऐसे ही सोने के आज के भाव पर बात आ गयी, क्योंकि सोने […]

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कष्ट के बाद ही सुख है

यदि मैं आप से पूछूं कि जिन्दगी के किस कार्य में सबसे बड़ा कष्ट है? तो आप दुनिया जहान का चक्कर कटा लेंगे अपने दीमाग को लेकिन यदि यही प्रश्न में किसी महिला से पूछूं तो झट से उत्तर दे देगी कि माँ बनने में ही सबसे बड़ा कष्ट है। अब यदि मैं पूछूं कि […]

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यह लड़ाई है गड़रियों की ना की भेड़ों की

कभी हम यह गीत सुना करते थे – यह लड़ाई है दीये की और तूफान की, लेकिन मोदीजी ने कहा कि यह लड़ाई है महागठबंधन और जनता की। मैं पहली बार मोदी जी के कथन से इत्तेफाक नहीं रखती, क्योंकि भारत में जनता है ही नहीं! यहाँ तो भेड़ें हैं, जो अपने-अपने गड़रियों से संचालित […]

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पधारो म्हारा देश या?

आखिर हमारे छोटे शहर सैलानियों का बढ़ता आवागमन क्यों नहीं झेल पाते हैं? अब आप मेरे शहर उदयपुर को ही ले लीजिए, शहर में बीचों-बीच झीलें हैं तो झीलों से सटी पहाड़ियों पर भी बसावट है। पुराने शहर में सड़के संकरी भी हैं और पार्किंग की जगह ही नहीं है। उदयपुर के पैलेस तक जाना […]

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रूमाल ढूंढना सीख लो

न जाने कितनी फिल्मों में, सीरियल्स में, पड़ोस की ताकाझांकी में और अपने घर में तो रोज ही सुन रही हूँ, सुबह का राग! पतियों को रूमाल नहीं मिलता, चश्मा नहीं मिलता, घड़ी नहीं मिलती, बनियान भी नहीं मिलता, बस आँखों को भी इधर-उधर घुमाया तक नहीं कि आवाज लगा दी कि मेरा रूमाल कहाँ […]

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