अजित गुप्ता का कोना

साहित्‍य और संस्‍कृति को समर्पित

Archive for the 'Uncategorized' Category

देश का बागवां सशक्त है

सखी! चुनाव ऋतु आ गयी। अपने-अपने दरवाजे बन्द कर लो। आँधियां चलने वाली है, गुबार उड़ने वाले हैं। कहीं-कहीं रेत के भँवर बन जाएंगे, यदि इस भँवरजाल में फंस गये तो कठिनाई में फँस जाओंगे। पेड़ों से सूखे पत्ते अपने आप ही झड़ने लगेंगे। जिधर देखों उधर ही पेड़ पत्रविहीन हो जाएंगे। सड़के सूखे पत्तों […]

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महिला होना चाहती हूँ

हमारे पिता बड़े गर्व से कहते थे कि मेरी बेटियाँ नहीं हैं, बेटे ही हैं। हमारा लालन-पालन बेटों की ही तरह हुआ, ना हाथ में मेहँदी लगाने की छूट, ना घर के आंगन में रंगोली बनाने की छूट, ना सिलाई और ना ही कढ़ाई, बस केवल पढ़ाई। हम सारा दिन लड़कों की तरह खेलते-कूदते, क्रिकेट […]

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घर वापसी

कहावत है कि गंगा में बहुत पानी बह गया। हमारा मन भी कितने भटकाव के बाद लेखन के पानी का आचमन करने के लिये प्रकट हो ही गया। न जाने कितना कुछ गुजर गया! कुम्भ का महामिलन हो गया और सरहद पर महागदर हो गया। राजनैतिक उठापटक भी खूब हुआ और सामाजिक चिंतन भी नया […]

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हुकूमत इनके खून में बहती है

यदि आप ध्यान से सुने और गौर करें तो टीवी के चैनल बदलते-बदलते न जाने कितने ऐसे बोल सुनाई दे जाएंगे जो आपको सोचने पर विवश करते हैं। कल ऐसा ही हुआ, टीवी से आवाज आयी – हुकूमत इनके खून में बहती है। तभी मेरे दिल ने कहा – गुलामी हमारे खून में बसती है। […]

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हीन भावना से ग्रस्त हैं हम

कल मैंने एक आलेख लिखा था – पाई-पाई बचाते हैं और रत्ती-रत्ती मन को मारते हैं । हम भारतीयों का पैसे के प्रति ऐसा ही अनुराग है। लेकिन इसके मूल में हमारी हीन भावना है। दुनिया जब विज्ञान के माध्यम से नयी दुनिया में प्रवेश कर रही थी, तब हम पुरातन में ही उलझे थे। […]

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